• Ratan Roy

कोरोना वायरस एक महामारी हैं जो जगत के पापों का प्रतिफल है।

Updated: Aug 11




1. कोरोना वायरस एक महामारी हैं जो जगत के पापों का प्रतिफल है।

जब मनुष्य सृष्टि के विरोध में कार्य करता है तब सृष्टि भी मनुष्य के विरोध मे हो जाता हैं।

यदि इंसान पर्यावरण को नुकसान पहुँचता हैं तब इसका अंजाम होता हैं प्राकृतिक आपदा जैसे - महामारी ( घातक बीमारी ), बाढ़, साइक्लोन, भूकंप, ओला वृष्टि, सुनामी, अकाल, नई नई बीमारी, और भी अनेक प्रकार का आपदा तथा महामारी हैं जो समय समय पर पृथ्वी पर आती रहती हैं।

सृष्टि का नियम है और उस नियम के विपरीत जीवन भयानक हैं जैसे यदि आप शरीर के विरोध में जीवन बितायेंगे तो शरीर आपके विरोध में हो जाएगी। यदि प्रकृति के विरोध में जीवन बितायेंगे तो प्रकृति आपके विरोध में हो जाएगी।



मनुष्य का शरीर या यह सृष्टि पाप और अधर्म के लिए नहीं हैं।

मनुष्य परमेश्वर की छवि तथा समानता में बनाया गया है पाप करने के लिए नहीं।

मनुष्य का पाप ही उसका असल शत्रु हैं। मनुष्य के पापों के कारण ही आज पूरी पृथ्वी शापित हैं। आज पाप ने हवा, पानी और पर्यावरण और मनुष्य का स्वाभाविक जीवन बदल दिया। मनुष्य जिस क्षेत्र में पाप करता है वैसा ही परिणाम उत्पन्न होता हैं जैसे अनैतिकता और व्यभिचार के कारण HIV बीमारी का जन्म हुआ मतलब जिस तरह का पाप उसी तरह की बीमारी या परिणाम। हमेशा पापों का परिणाम जीवन के बहुत भागों को प्रभावित कर देता हैं। कुल मिलाकर पाप मृत्यु के तुल्य पीड़ा देता है।

पाप का परिणाम हमेशा दुःख होता हैं।

पाप का परिणाम कभी भी साथ ही साथ नही होता उसका परिणाम जब आप सोचेंगे भी नहीं तभी आपको आपके परिवार को बच्चों बर्बाद कर देगा।

पाप का सजा साथ ही साथ नहीं मिलता इसलिए लोग ज्यादा पाप करते हैं।

पाप का असर सदा आपके जीवन, परिवार, समाज व देश पर पड़ता है।


2. तो क्या पाप का कोई समाधान है?

पाप का समाधान प्रभु यीशु मसीह है। यीशु नाम का अर्थ है पापों से उद्धार करने वाला। उद्धार का अर्थ है बचाने वाला या सुरक्षित करने वाला। एकमात्र प्रभु यीशु मसीह हैं जिनके पास पाप क्षमा करने का अधिकार हैं और किसी के पास नहीं क्योंकि एकमात्र यीशु ही है जो पापियों के लिए बलिदान हुआ कोई और नही। पवित्रशास्त्र बाइबल में लिखा हैं बिना लहू बहाये पाप की क्षमा नहीं है। यीशु के आने से पहले मनुष्य अपने पापों के लिए पशुओं का इस्तेमाल करते थे। पशुओं का लहू मनुष्य के पापों को ढकता था परंतु सदा के लिए दूर नहीं होता था। यीशु के आने के बाद मनुष्यों का पाप सदाकाल के लिए दूर हो गया क्योंकि यीशु मसीह का लहू निर्दोष व निष्कलंक व निष्पाप था। जैसे आज अस्पताल मे किसी बीमार को रक्त की जरूरत होती हैं तो डॉक्टर उसे किसी पशु का रक्त नही चढ़ाता बल्कि उसे किसी मनुष्य का रक्त चढ़ाया जाता हैं। पशुओं का लहू मनुष्य के पापो को दूर नही कर सकता। मनुष्य के पापों के लिए किसी धर्मी व निर्दोष व्यक्ति की जरूरत थी जो पृथ्वी में कहीं नहीं था क्योंकि सबने पाप किया था और सब पाप से ग्रसित थे इसलिए यीशु मसीह मनुष्य बनकर इस पृथ्वी में आया ताकि अपने लहू से मनुष्य के पापों को सदाकाल के लिए दूर करे। प्रभु यीशु मसीह ने कहा मैं धर्मियों को नहीं परन्तु पापियों को बचाने आया हूं। हम सभी जानते हैं कि पाप का मूल्य या परिणाम मृत्यु है अब परमेश्वर की व्यवस्था की मांग है मृत्यु के बदले मृत्यु अर्थात सब जातियों के लोगों के पापों के कीमत की सजा जो मृत्यु हैं प्रभु यीशु मसीह ने अपने ऊपर लेकर जो पवित्र निर्दोष निष्कलंक मनुष्य था क्रूस पर बलिदान हो गया ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह अपने सब पापों से छुटकारा पायेगा और मनुष्य जाति की सारी पीढ़ी जो हैं और जो आने वाली हैं पापों की सजा से छुटकारा पायेगा।






अब सवाल है जो विश्वास करे वहीं उद्धार पायेगा सब नही क्योंकि सब लोग यीशु मसीह पर विश्वास नहीं करते क्योंकि लोग समझते हैं कि यीशु मसीह विदेशी धर्म या ईसाई धर्म का प्रवर्तक या संस्थापक है।


बाइबल कहता है कि यीशु मसीह ना किसी धर्म का प्रवर्तक हैं ना ही संस्थापक। बहुत लोगों ने आज प्रभु यीशु मसीह को अपने इनकम का मार्ग बना लिया जिस कारण लोग यीशु की सच्चाई को जानने में असमर्थ हो गये। यीशु ने कहा तुम सच्चाई को जानोगे तो सच्चाई तुम्हें आज़ाद करेंगी और सच यीशु मसीह है। एक बार यीशु मसीह को अपने जीवन में मौका दे वो आपके जीवन को बदल देगा आपके धर्म को नहीं।


अपना जीवन परिवर्तन करो धर्म नही। मनुष्य धर्म परिवर्तन करता है परन्तु परमेश्वर जीवन परिवर्तन करता है।




प्रकाशित वाक्य की 7 कलीसियाओं में सेे 5 कलिसियाओ को पश्चाताप करने के लिए कहा गया क्योंकि उनके काम परमेश्वर के योग्य नहीं थे यदि आज कलिसिया मन न फिराए तो परमेश्वर कलीसिया को ही हटा देगा।





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