• Ratan Roy

Aatmahatya Karane Ke 45 Kaaran | आत्महत्या करने के 45 कारण

Updated: Aug 11



  1. निंदित होने के कारण

  2. अपमानित होने के कारण

  3. जलन व ईर्ष्या के कारण

  4. डर के कारण

  5. चिंता के कारण

  6. तनावग्रस्त होने के कारण

  7. कर्ज़ के कारण

  8. गरीबी के कारण

  9. बीमारी के कारण

  10. सताये जाने के कारण

  11. किसी को दुःख पहुचाने के कारण

  12. विफलता के कारण

  13. लोगों के अपमान के कारण

  14. लड़ाई झगड़े के कारण

  15. न्याय नहीं मिलने के कारण

  16. फैल होने के कारण

  17. किसी के मृत्यु के शोक के कारण

  18. अपंगता के कारण

  19. शरीर के रूप रंग सही नहीं होने के कारण

  20. सुंदर नहीं होने के कारण

  21. उत्पीड़न के कारण

  22. बलात्कार के कारण

  23. शोषण के कारण

  24. पद नहीं मिलने के कारण

  25. परिश्रम का फल नहीं मिलने के कारण

  26. ग़लतफ़हमी के कारण

  27. शक या संदेह के कारण

  28. तंग होने के कारण

  29. धोखा खाने के कारण

  30. विश्वासघात करने के कारण

  31. अपने नज़रो में गिरने के कारण

  32. हँसी मज़ाक उड़ाने के कारण

  33. किसी दुर्घटना के कारण

  34. भारी शर्मिंदा होने के कारण

  35. ख़ुद का ग़लत फ़ायदा उठाने के कारण

  36. गुप्त रोग के कारण

  37. जातिवाद के कारण

  38. प्रेम संबंध के कारण

  39. नौकरी के कारण

  40. अकाल के कारण

  41. महामारी के कारण

  42. इलाज़ न होने के कारण

  43. किसी की हत्या करने के कारण

  44. प्रसिद्ध नहीं होने के कारण

  45. मोटापे के कारण


आत्महत्या से छुटकारे का मार्ग क्या है? प्रभु यीशु ही आपके छुटकारे का मार्ग है।

प्रभु यीशु मसीह किसी धर्म का संस्थापक या प्रवर्तक नहीं था और ना ही ईसाई धर्म का संस्थापक प्रभु यीशु मसीह है परंतु ईसाई धर्म का संस्थापक मनुष्य है।

प्रभु यीशु किसी एक मानव जाति के लिए नहीं आया था परंतु संपूर्ण पृथ्वी के लोगों के पापों के बलिदान के लिए परमेश्वर होने पर भी मनुष्य बनकर इस पृथ्वी पर मनुष्य के पापों के लिए बलिदान होने के लिए आया था। आज लोगों ने प्रभु यीशु को कमाई का साधन बना दिया जिस कारण लोग प्रभु यीशु की सच्चाई से दूर हैं। प्रभु यीशु किसी के धर्म को परिवर्तित करने नहीं आया था परंतु वह लोगों को उनके पापों से छुड़ाने आया था। प्रभु यीशु ने कहा मैं धर्मियों को नहीं बल्कि पापियों को बचाने आया हूँ। क्योंकि पाप की कीमत मृत्यु हैं और सम्पूर्ण पृथ्वी के लोगों के पापों के लिए प्रभु यीशु दुर्दशा के साथ मारा गया ताकी हमें पाप की कीमत ना उठाना पड़े। प्रभु यीशु आपके पापों के लिए बलिदान हुआ आपके पापों के लिए वह क्रूस पर चढ़ाया गया उसने आपको रोगों को सह लिया आपके दुखों को उठा लिया और हमारे अपराधों के कारण उसे घायल किया गया और कुचला गया। हमारी शांति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी और उसके मार खाने से हम लोग चंगे हो गए। पवित्रशास्त्र बाइबल में लिखा है और बिना लहू बहाये पाप की क्षमा प्राप्त नहीं होती प्रभु यीशु का लहू जगत के पापों का प्रायश्चित है कोई और वस्तु या धर्म-कर्म नहीं। न तो उसने पाप किया और न उसके मुँह से छल की कोई बात निकली। प्रभु यीशु गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दु:ख उठाकर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्‍चे न्यायी के हाथ में सौंपता था। वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया, जिससे हम पापों के लिये मरकर धार्मिकता के लिये जीवन बिताएँ उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए । 1 पतरस 2:22‭-‬24

मसीह यीशु हम से प्रेम रखता है, और उसने अपने लहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है,

प्रकाशितवाक्य 1:5

“क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह नष्‍ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्‍वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा कि जगत पर दण्ड की आज्ञा दे, परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।

यूहन्ना 3:16‭-‬17

परन्तु जितने लोगों ने प्रभु यीशु को ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्‍वर की सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विश्‍वास रखते हैं। वे न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्‍वर से उत्पन्न हुए हैं। यूहन्ना 1:12‭-‬13





अब विश्वास क्यों जरूरी हैं क्योंकि की:

कि यदि तू अपने मुंह से यीशु मसीह को प्रभु जानकर स्वीकार करे और अपने मन से निश्चय विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में सेजीवित किया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। क्योंकि धामिर्कता के लिये मन से भरोसा किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से स्वीकार किया जाता है। क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई यीशु मसीह पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। क्योंकि जो कोई प्रभु यीशु मसीह का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।


पवित्रशास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया और उसे गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार वह तीसरे दिन जी भी उठा।


यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह (यीशु मसीह) हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते है।

और यीशु मसीह की ओर से, जो विश्वासयोग्य साक्षी और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा, और पृथ्वी के राजाओं का शासक है, तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे: जो ( यीशु मसीह) हम से प्रेम रखता है, और जिस ने अपने लहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है।


यीशु मसीह वही हमारे पापों का प्रायश्चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का बलिदान है।


इन सब बाईबल के पदों को पढ़ने के बाद आपको अनुभव हो गया होगा कि यीशु कौन है और क्यो वह क्रूस पर आपके लिए बलिदान हुए।


आपको पूरे मन से विश्वास यह करना है कि:

1. यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र हैं।

2. यीशु ही प्रभु हैं।

3. यीशु मसीह परमेश्वर होने पर भी मनुष्य बनकर पृथ्वी में आया।

4 . यीशु मसीह मेरे पापों का बलिदान (प्रायश्चित) हैं।

5. यीशु मेरे पापों के कारण मारा गया ।

6. और उसे गाड़ा गया।

7. और वह तीसरे दिन मुर्दों में से जी उठा ।


अब आइये इस प्रार्थना को कीजिये :

हे प्रभु यीशु मैं अपने पापों को त्यागकर अपने पूरे मन से तुझ पर विश्वास करता या करती हूं कि तू मेरे पापों के कारण क्रूस पर मारा गया और मुझे धर्मी ठहराने के लिये तीसरे दिन मुर्दों में से जी उठा। हे प्रभु मेरे पापों को क्षमा कर और मुझे नया आत्मा और नया मन दे ताकि मैं तेरे वचनों में चल संकू।।

यीशु मसीह के नाम से आमीन।।


और आपके विश्वास के बाद आप परमेश्वर की संतान बन जाते हैं और पवित्रशास्त्र कहता है

अब जो कोई प्रभु यीशु मसीह में है तो वो नई सृष्टि है औऱ देखो पुरानी बातें बीत गई हैं सब कुछ नया हो गया है।


परमेश्वर आपके पापों को, और आपके अधर्म के कामों को फिर कभी याद नहीं करेगा। और जब इन पापों की माफ़ी हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान बाक़ी नहीं रहा


परमेश्वर आपको आशीष दे।


एक बार यीशु मसीह को अपने जीवन में मौका दे वो आपके जीवन को बदल देगा आपके धर्म को नहीं।

अपना जीवन परिवर्तन करो धर्म नही। मनुष्य धर्म परिवर्तन करता है परन्तु परमेश्वर जीवन परिवर्तन करता है।


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