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  • Ratan Roy

बाइबल के अनुसार उपवास कैसे करना चाहिए? How to fast according to the Bible?



उपवास करने से पहले उपवास के अर्थों को समझना जरूरी हैं।

उपवास भक्ति और समर्पण का तथा परमेश्वर के अधीन होने का मार्ग हैं। 

उपवास परमेश्वर की इच्छा को जानने का माध्यम है।

Ephesians | इफिसियों 5:17 इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्छा क्या है? Romans | रोमियो 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो॥

1. उपवास कब करना चाहिए ?

पवित्रआत्मा की अगुवाई या प्रेरणा के द्वारा।

पढ़े मत्ती 4:1-2

तब पवित्रआत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि शैतान से उस की परीक्षा हो। वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, तब उसे भूख लगी।



2. उपवास के दिन क्या करना चाहिए ?

अधिक से अधिक बाइबल अध्ययन करें और वचनों को याद करे और स्वयं वचनों को तैयार करे। दूसरों के लिए जरूर प्रार्थना करें ऐसा नहीं करे की प्रार्थना का सारा विषय आप ख़ुद ही हो। आराधना करें और आत्मिक गीतों को भजनों को करें। पवित्रआत्मा को अपने जीवन में अनुमति दे अधिकार दे और प्रार्थना करें। पवित्रआत्मा के साथ प्रार्थना करें।

पर हे प्रियो, तुम अपने अति पवित्र विश्‍वास में उन्नति करते हुए और पवित्र आत्मा में प्रार्थना करते हुए,

यहूदा 1:20

इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है : क्योंकि हम नहीं जानते कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए, परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर, जो बयान से बाहर हैं, हमारे लिये विनती करता है; और मनों का जाँचनेवाला जानता है कि आत्मा की मनसा क्या है? क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्‍वर की इच्छा के अनुसार विनती करता है।

रोमियों 8:26‭-‬27

हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो,

इफिसियों 6:18

“मैं दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों पर अपना अनुग्रह करनेवाली और प्रार्थना सिखानेवाली आत्मा उण्डेलूँगा।

जकर्याह 12:10

और आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने-अपने मन में प्रभु के सामने गाते और कीर्तन करते रहो। और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्‍वर पिता का धन्यवाद करते रहो।

इफिसियों 5:19‭-‬20



3. उपवास से हमें क्या-क्या लाभ होता हैं ?

उपवास से आत्मिक उन्नति होता हैं।

परमेश्वर की पहचान में बढ़ाता है।

आत्मिक भूख और प्यास देता हैं।

उपवास हमें नम्र बनाता हैं।

परमेश्वर के अनुग्रह को प्राप्त करने में सहायता करता है।

परमेश्वर के निकट जाने में सहायता करता है।

जीवन के फैसले लेने में सहायता करता है।

अपने आप को जांचने का समय होता हैं।

हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की ओर फिरें!

Let us search and try our ways, and turn again to the LORD.

विलापगीत 3:40

नीचे दिए गए बाइबल के पदों से और ढूढ़े की आपको उपवास से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं।



4. उपवास में क्या नहीं करना चाहिए ?

दिखावट या पाखंड नहीं करना चाहिए।

कुछ लोग रिकॉर्ड बनाने के लिए करतें हैं और दूसरों को दिखाने के लिए की देखो मैंने इतना दिन उपवास किया जो करना ग़लत हैं।

शोकित चेहरा बनाके नहीं रहना चाहिए।

अपने स्वार्थ के लिए नहीं करना चाहिए।

मन्नत मानकर नही करना चाहिए।

प्रसिद्ध होने के लिए नहीं करना चाहिए।

पब्लिसिटी जैसा नहीं करना चाहिए।

गलत धारणाओं के साथ नहीं करना चाहिए।

अविश्वासयो के समान नही करना चाहिए।

अपने को प्रसन्न करने के लिए नहीं करना चाहिए।

खाने पर ध्यान नहीं रखना चाहिए।

अधिक पानी नही पीना चाहिए या Tea नहीं लेना चाहिए।

सोना नहीं चाहिए।

समय नहीं बर्बाद करना चाहिए।

Facebook और Youtube में समय नही बर्बाद करना चाहिए।

मार्केटिंग और घर के काम मे व्यस्त नहीं होना चाहिए।

घर का बिना प्रबंध किए उपवास नहीं करना चाहिए।

शारीरिक संभोग से दूर रहना चाहिए।

शारीरिक लालसाओं से दूर रहना चाहिए।

इंटरनेट से दूर रहे तो अधिक बेहतर है।



4. उपवास की कुछ गलत धारणायें जिनसे सावधान रहना चाहिए।

●यीशु ने 40 दिन उपवास किया मैं भी करूँगा। जैसा कि कोई नियम समझ कर करते हैं।

●सिर्फ उपवास करने से ही परमेश्वर प्रार्थना सुनता है।

●उपवास में फलों को खा सकते हैं।

●पवित्र शास्त्र मसीहियों को उपवास रखने के लिए आदेश नहीं देता है।



5. उपवास से सम्बंधित बाइबल के पद ★


इसी विषय पर हम ने उपवास कर के अपने परमेश्वर से प्रार्थना की, और उसने हमारी सुनी।

So we fasted and besought our God for this and he was intreated of us.

एज्रा 8:23


तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा।

And I set my face unto the Lord God, to seek by prayer and supplications, with fasting, and sackcloth, and ashes.

दानिएल 9:3


कि तू जा कर शूशन के सब यहूदियों को इकट्ठा कर, और तुम सब मिलकर मेरे निमित्त उपवास करो, तीन दिन रात न तो कुछ खाओ, और न कुछ पीओ। और मैं भी अपनी सहेलियों सहित उसी रीति उपवास करूंगी। और ऐसी ही दशा में मैं नियम के विरुद्ध राजा के पास भीतर जाऊंगी; और यदि नाश हो गई तो हो गई।

Go, gather together all the Jews that are present in Shushan, and fast ye for me, and neither eat nor drink three days, night or day: I also and my maidens will fast likewise; and so will I go in unto the king, which is not according to the law: and if I perish, I perish.

एस्तेर 4:16


तौभी यहोवा की यह वाणी है, अभी भी सुनो, उपवास के साथ रोते-पीटते अपने पूरे मन से फिरकर मेरे पास आओ।

Therefore also now, saith the LORD, turn ye even to me with all your heart, and with fasting, and with weeping, and with mourning.

योएल 2:12


Acts | प्रेरितों के काम 14:23

और उन्होंने हर एक कलीसिया में उन के लिये प्राचीन ठहराए, और उपवास सहित प्रार्थना कर के, उन्हें प्रभु के हाथ सौंपा जिस पर उन्होंने विश्वास किया था।


Acts | प्रेरितों के काम 13:2 जब वे उपवास सहित प्रभु की उपासना कर रहे था, तो पवित्र आत्मा ने कहा; मेरे निमित्त बरनबास और शाऊल को उस काम के लिये अलग करो जिस के लिये मैं ने उन्हें बुलाया है।


2 Corinthians | 2 कुरिन्थियों 6:5

कोड़े खाने से, कैद होने से, हुल्लड़ों से, परिश्रम से, जागते रहने से, उपवास करने से।


“जब तुम उपवास करो, तो कपटियों के समान तुम्हारे मुँह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुँह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें। मैं तुम से सच कहता हूँ कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। ताकि लोग नहीं परन्तु तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने। इस दशा में तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।

मत्ती 6:16‭, ‬18


Isaiah | यशायाह 58:3-58:5

वे कहते हैं, क्या कारएा है कि हम ने तो उपवास रखा, परन्तु तू ने इसकी सुधि नहीं ली? हम ने दु:ख उठाया, परन्तु तू ने कुछ ध्यान नहीं दिया? सुनो, उपवास के दिन तुम अपनी ही इच्छा पूरी करते हो और अपने सेवकों से कठिन कामों को कराते हो।


Psalm | भजन संहिता 35:13

जब वे रोगी थे तब तो मैं टाट पहिने रहा, और उपवास कर करके दु:ख उठाता रहा; और मेरी प्रार्थना का फल मेरी गोद में लौट आया।



Psalm | भजन संहिता 69:10

जब मैं रोकर और उपवास करके दु:ख उठाता था, तब उससे भी मेरी नामधराई ही हुई।



1 Corinthians | 1 कुरिन्थियों 7:5

तुम एक दूसरे से अलग न रहो; परन्तु केवल कुछ समय तक आपस की सम्मति से कि प्रार्थना के लिये अवकाश मिले, और फिर एक साथ रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारे असंयम के कारण शैतान तुम्हें परखे।



2 Samuel | 2 शमूएल 12:21

तब उसके कर्मचारियों ने उस से पूछा, तू ने यह क्या काम किया है? जब तक बच्चा जीवित रहा, तब तक तू उपवास करता हुआ रोता रहा; परन्तु ज्योंही बच्चा मर गया, त्योंही तू उठ कर भोजन करने लगा।



Psalm | भजन संहिता 109:24

उपवास करते करते मेरे घुटने निर्बल हो गए; और मुझ में चर्बी न रहने से मैं सूख गया हूं।



2 Samuel | 2 शमूएल 12:16

और दाऊद उस लड़के के लिये परमेश्वर से बिनती करने लगा; और उपवास किया, और भीतर जा कर रात भर भूमि पर पड़ा रहा।



Matthew | मत्ती 9:14-9:15

तब यूहन्ना के चेलों ने उसके पास आकर कहा; क्या कारण है कि हम और फरीसी इतना उपवास करते हैं, पर तेरे चेले उपवास नहीं करते?



Zechariah | जकर्याह 7:3-7:5

और सेनाओं के यहोवा के भवन के याजकों से और भविष्यद्वक्ताओं से भी यह पूछें, क्या हमें उपवास कर के रोना चाहिये जैसे कि कितने वर्षों से हम पांचवें महीने में करते आए हैं?



1 Kings | 1 राजा 21:27

एलिय्याह के ये वचन सुनकर अहाब ने अपने वस्त्र फाड़े, और अपनी देह पर टाट लपेट कर उपवास करने और टाट ही ओढ़े पड़ा रहने लगा, और दबे पांवों चलने लगा।


Nehemiah | नहेमायाह 1:4

ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कह कर प्रार्थना करता रहा।



Luke | लूका 2:37

वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर करके रात-दिन उपासना किया करती थी।


Mark | मरकुस 2:18

यूहन्ना के चेले, और फरीसी उपवास करते थे; सो उन्होंने आकर उस से यह कहा; कि यूहन्ना के चेले और फरीसियों के चेले क्यों उपवास रखते हैं? परन्तु तेरे चेले उपवास नहीं रखते।



2 Corinthians | 2 कुरिन्थियों 11:27

परिश्रम और कष्ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में।


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